Tuesday, March 8, 2011

हे नारी तुझे शत शत नमन!



उर्जा का श्रोत हो तुम
चंचल नदी सा तुम्हारा मन
नभ सा असीम स्नेह है तुम्हारा
करे हर होई तुम्हारा मनन

निहारिका हो खुशियों का
मोह लेती हो तुम सबका मन
आसान कर देती हो मुश्किले
दे कर मुस्कुराहटें अनंत

धन्य है तुम्हे पाकर हर मानुस
हे नारी तुझे शत शत नमन !

- साहिल 

Thursday, March 3, 2011

न होती तुम तो मैं न होता...



न होती तुम तो मैं न होता
न जागती तुम तो मैं न सोता
सुकून था तेरे आँचल में हमेशा
न होती तुम तो मैं था रोता

हर शब्द दुआ है तुम्हारी
हर स्पर्श दवा है तुम्हारी
गिर कर हमेशा मैं न संभलता
न होती तुम तो मैं न होता

हर साँसे मेरी तुम से ही चलती
हर बातें मेरी तुम पर ही रूकती
हर बातें मेरी कौन था सुनता
न होती तुम तो मैं न होता

चली गयी तुम, न रोक पाया तुम्हे
खो गयी तुम, न खोज पाया तुम्हे
खुदा भी रोया, न रोक पाया खुद को
जो होती तुम तो वो न रोता

- साहिल 

Wednesday, February 2, 2011

लम्हों के प्याले...



चंद लम्हों की डोर से जुडी है ज़िन्दगी
चंद लम्हों के ओर यूँ झुकी है ज़िन्दगी!
हर लम्हों को प्याले में उतार दे ए साकी
अब तो मैकदे की और मुड़ी है ज़िन्दगी!

- साहिल 

Sunday, January 9, 2011

न होता मैं, तो क्या होता!

न था जब मैं, तो क्या था
जो हूँ अब मैं, तो क्या होगा!
गुल फिरदौस में तो अब भी खिलते है
न रहूँ जब मैं तो क्या वो गुलिस्तान होगा!

जो हूँ अब मैं तो सब रहनुमा है मेरे
न होता मैं तो क्या होता!

अब भी याद आता है साहिल!
तेरे बातों पर उसका यों कह देना
जो हूँ अब मैं, तो जग है मेरा
न होता मैं, तो क्या होता!

- साहिल 

Tuesday, January 4, 2011

२०११: एक नयी उम्मीद!

पौ फटा और नयी सुबह ने आग़ाज़ किया,
उंदी-मुंदी पलकों ने हल्का सा ये एहसास किया
नयी रौशनी नयी आशाएं भर कर आई है
हमने इस वर्ष को नयी उम्मीदों के नाम किया !

- साहिल 

Thursday, December 30, 2010

यकीं नहीं होता!

लौट आये उन राहों से, यकीं नहीं होता,
यादें ऐसी है, सिलसिला ख़त्म नहीं होता
पलट कर देखा, बीते लम्हों के पन्नो पर
जितनी देर भी रहा, लम्हा ख़त्म नहीं होता

जीता हूँ उन लम्हों को बार बार
कैद हूँ मैं अब उन राहों में,
भटक जायेगा साहिल, ये यकीं नहीं होता

- साहिल 

Friday, December 3, 2010

मृग तृष्णा की मुझे तलाश है!

दूर हो कर भी करीब हो मेरे,
कैसा ये एहसास है.
बारिश में भी प्यासा हूँ
कैसी मेरी प्यास है!

तुम खुशबू बन उड़ जाओगी
मैं कुछ भी न कर पाउँगा
हाथ फैला कर छु लू तुम्हे
अब बस इतनी सी आस है

हूँ हकीकत से रु-ब-रु मैं
अब बस वोह लम्हे मेरे पास है
जाने किस सोच मे डूबा हूँ मैं
मृग तृष्णा की शायद मुझे तलाश है!

- साहिल