Wednesday, November 30, 2011

जुदा होकर उससे जुड़ा जुड़ा सा कही



शाख पे लटकते पत्ते की तरह
चंद लम्हों की सोहबत ही सही
टूट कर जुदा हो जायेंगे तुमसे
ग़म हमे अब इस बात का नहीं

दर्द गर हुआ अलग होने में
ये समझना मैं बेवफा ही सही
कभी वक़्त मिला तो बताएँगे
खलिश थी ज़ेहन में, सुकून की छाया नहीं

जाने कितने मौसम देखे
एक मौसम खिंसा का भी सही
कोई अब ये पयाम न पंहुचा दे उस तक
जुदा होकर उससे जुड़ा जुड़ा सा कही

- साहिल 

Thursday, September 8, 2011

बंद है आखें इसबार और सपने अधर से खाली...



बेसबर सुबह का इंतज़ार नहीं अब
ख्यालों की शफक है इतनी सारी,
बाँहों में लपेटे अरमानो को
याद आई वोह शाम न भुलाने वाली

खिल उठे फूल उन यादों की
कह गए भवरें कानो में बातें सारी
हवाओ में खुशबू ऐसी बहने लगी
तितलियाँ यादों की उड़ने लगी डाली डाली

ऐसी नींद में सोया हूँ, अब न जगाओ मुझे
बंद है आखें इसबार और सपने अधर से खाली
गुज़रे वक़्त के पन्ने पलट पलट कर
बुन रहा हूँ सपनो की चादर न्यारी
ओढ़ कर सो जाऊंगा उस चादर को
शायद फिर से जी सकूँ वोह वक़्त इस बारी

- साहिल 

Friday, August 19, 2011

कौन है वोह शख्स!



कौन है वोह, कैसी ये आवाज़ है
जानता हूँ मैं शायद इसे
ऐसा ये एक एहसास है
चलता है साथ मेरे अक्सर
मेरा अक्स भी इसके पास है
आखिर कौन है ये शख्स
किसकी ये आवाज़ है

सब जान गया है वोह अब
मैं उससे अब भी कुछ अनजान हूँ
मेरे शक्शियत पर अब बस है उसका
मैं ये जान कर भी कुछ अनजान हूँ
खौफ लगता है मुझे अब खुद से
क्या ये मेरा ख्वाब है
आखिर कौन है वोह शख्स
किसकी मुझे तलाश है

पल पल बढ़ा है साथ मेरे
शायद उसको मेरी दरकार है
कल रात दर्पण में जब खुद को देखा
पता चला वोह तो मेरा अहंकार है
दू:स्वप्न हो वोह मेरा
इतनी अब मेरी मुराद है
आखिर मैं ही था वोह शख्स
मेरे अहंकार की वोह आवाज़ है

- साहिल 

Sunday, June 19, 2011

हो तुम मेरे बाबा!



कर्मठ तुम, तुम कर्म के ज्ञाता
धैर्यवान तुम, तुम धैर्य के दाता
त्यागी तुम, तुम कर्ण के भ्राता
जटिल तुम, तुमको जग समझ न पाता
बन जाऊ तुम सा एक दिन
ऐसी है मेरी एक छोटी सी आशा
मुन्ना तुम्हारा मैं, हो तुम मेरे बाबा

थे उंगली पकड़ कर साथ तुम वरना
जीवन की आपा-धापी में खो जाता मैं
फ़र्ज़ निभाना सीखा तुम से वरना
जीवन क संघर्षो में, टूट जाता मैं
प्रेरणा का अदभुत श्रोत हो तुम
ऐसे हो तुम मेरे बाबा
बन जाऊ तुम सा एक दिन
ऐसी है मेरी एक छोटी सी अभिलाषा
मुन्ना तुम्हारा मैं, हो तुम मेरे बाबा
मुन्ना तुम्हारा मैं, हो तुम मेरे बाबा

- साहिल 

Wednesday, May 18, 2011

न जाने ये क्या हो गया...



न जाने ये क्या हो गया,
खुली आखों से वो कब सो गया
अपनों के कितने करीब था कभी
न जाने किन रास्तो में वो खो गया
थक गयी है ये नज़रें उसकी या
मंजिल कही ओझल हो गया
न जाने ये क्या हो गया...

चल पड़ा आगे, न देखा मुड़ कर
रास्तों पर आशाएं सारे बो गया
मुद्दत से तलाश थी जिस मृगतृष्णा की
पहुचते ही न जाने वो कहा खो गया
न जाने ये क्या हो गया...

पल पल गुज़रती ज़िन्दगी उसकी
क्या वो इंसान पत्थर दिल हो गया
दम तोडा जिस मोड़ पर उसने
वो मोड़ मील का पत्थर हो गया
न जाने ये क्या हो गया
खुली आखों से वो कब सो गया!

- साहिल 

Sunday, May 8, 2011

जीवन मेरा सफल हो जाए



जीवन मेरा सफल हो जाए,
हर जनम में अगर तू मिल जाए|
ममता भरा आँचल मिल जाए,
लोरी सुन तेरी, नींद आ जाए|

जख्म पल में यूँ भर जाए,
देखू तुझे तो सुकून आ जाए|
मंदिर-मस्जिद हम सब हो आए,
पर सारे दर आखिर तुझ तक आये||

युग भले ही बदलता जाए,
माँ तेरी महिमा बढती जाए|
जीवन मेरा सफल हो जाए,
हर जनम में अगर तू मिल जाए||

- साहिल 

Thursday, May 5, 2011

बस इंतज़ार है उनका!



अपने हिस्से का प्यार संभाले बैठे है
बस इंतज़ार है उनका,
कभी मिलेंगे तो बताएँगे
कितना चाहा है हर दिन उनको

अपने हिस्से की आस लगाये बैठे है
बस इंतज़ार है उनका,
कभी मिलेंगे तो बताएँगे
कितना सताया है हर दिन मुझको

अपने हिस्से का ग़म लिए बैठे है
बस इंतज़ार है उनका,
पता है शायद साकी को
हर जाम बिना पूछे भर जाती है वोह

हर हिस्सा अधूरा है मेरा
अब बस इंतज़ार है उनका,
शायद पता है ये उन्हें
इसलिए पलकों की कतारें भीगा जाती है वोह!

- साहिल