Sunday, June 19, 2011

हो तुम मेरे बाबा!



कर्मठ तुम, तुम कर्म के ज्ञाता
धैर्यवान तुम, तुम धैर्य के दाता
त्यागी तुम, तुम कर्ण के भ्राता
जटिल तुम, तुमको जग समझ न पाता
बन जाऊ तुम सा एक दिन
ऐसी है मेरी एक छोटी सी आशा
मुन्ना तुम्हारा मैं, हो तुम मेरे बाबा

थे उंगली पकड़ कर साथ तुम वरना
जीवन की आपा-धापी में खो जाता मैं
फ़र्ज़ निभाना सीखा तुम से वरना
जीवन क संघर्षो में, टूट जाता मैं
प्रेरणा का अदभुत श्रोत हो तुम
ऐसे हो तुम मेरे बाबा
बन जाऊ तुम सा एक दिन
ऐसी है मेरी एक छोटी सी अभिलाषा
मुन्ना तुम्हारा मैं, हो तुम मेरे बाबा
मुन्ना तुम्हारा मैं, हो तुम मेरे बाबा

- साहिल 

6 comments:

  1. cho gayi tumarhi kavitha, aisi hi likhte raho, aisee hai hamari aasha! :)

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  2. बहुत बढ़िया लगी.....

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  3. धन्यवाद वीणा जी!

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  4. @मोहित : धन्यवाद दोस्त! :)

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