Sunday, May 8, 2011

जीवन मेरा सफल हो जाए



जीवन मेरा सफल हो जाए,
हर जनम में अगर तू मिल जाए|
ममता भरा आँचल मिल जाए,
लोरी सुन तेरी, नींद आ जाए|

जख्म पल में यूँ भर जाए,
देखू तुझे तो सुकून आ जाए|
मंदिर-मस्जिद हम सब हो आए,
पर सारे दर आखिर तुझ तक आये||

युग भले ही बदलता जाए,
माँ तेरी महिमा बढती जाए|
जीवन मेरा सफल हो जाए,
हर जनम में अगर तू मिल जाए||

- साहिल 

Thursday, May 5, 2011

बस इंतज़ार है उनका!



अपने हिस्से का प्यार संभाले बैठे है
बस इंतज़ार है उनका,
कभी मिलेंगे तो बताएँगे
कितना चाहा है हर दिन उनको

अपने हिस्से की आस लगाये बैठे है
बस इंतज़ार है उनका,
कभी मिलेंगे तो बताएँगे
कितना सताया है हर दिन मुझको

अपने हिस्से का ग़म लिए बैठे है
बस इंतज़ार है उनका,
पता है शायद साकी को
हर जाम बिना पूछे भर जाती है वोह

हर हिस्सा अधूरा है मेरा
अब बस इंतज़ार है उनका,
शायद पता है ये उन्हें
इसलिए पलकों की कतारें भीगा जाती है वोह!

- साहिल 

Friday, March 18, 2011

आओ खेले होली के रंग...



गयी शिशिर आई बसंत,
गयी ठिठुरन आई हुडदंग,
बच्चे बूढ़े हुए सब दबंग,
भूले शिकवे मिले सब संग,

उड़े गुलाल बहे हर रंग,
उडाओ अबीर अंजानो के संग,
मिलाओ प्यार रंग के संग,
लगाओ ठहाके पीकर भांग,

हर दूरी होगी आज कम,
आओ खेले होली के रंग...

- साहिल 

Tuesday, March 8, 2011

हे नारी तुझे शत शत नमन!



उर्जा का श्रोत हो तुम
चंचल नदी सा तुम्हारा मन
नभ सा असीम स्नेह है तुम्हारा
करे हर होई तुम्हारा मनन

निहारिका हो खुशियों का
मोह लेती हो तुम सबका मन
आसान कर देती हो मुश्किले
दे कर मुस्कुराहटें अनंत

धन्य है तुम्हे पाकर हर मानुस
हे नारी तुझे शत शत नमन !

- साहिल 

Thursday, March 3, 2011

न होती तुम तो मैं न होता...



न होती तुम तो मैं न होता
न जागती तुम तो मैं न सोता
सुकून था तेरे आँचल में हमेशा
न होती तुम तो मैं था रोता

हर शब्द दुआ है तुम्हारी
हर स्पर्श दवा है तुम्हारी
गिर कर हमेशा मैं न संभलता
न होती तुम तो मैं न होता

हर साँसे मेरी तुम से ही चलती
हर बातें मेरी तुम पर ही रूकती
हर बातें मेरी कौन था सुनता
न होती तुम तो मैं न होता

चली गयी तुम, न रोक पाया तुम्हे
खो गयी तुम, न खोज पाया तुम्हे
खुदा भी रोया, न रोक पाया खुद को
जो होती तुम तो वो न रोता

- साहिल 

Wednesday, February 2, 2011

लम्हों के प्याले...



चंद लम्हों की डोर से जुडी है ज़िन्दगी
चंद लम्हों के ओर यूँ झुकी है ज़िन्दगी!
हर लम्हों को प्याले में उतार दे ए साकी
अब तो मैकदे की और मुड़ी है ज़िन्दगी!

- साहिल 

Sunday, January 9, 2011

न होता मैं, तो क्या होता!

न था जब मैं, तो क्या था
जो हूँ अब मैं, तो क्या होगा!
गुल फिरदौस में तो अब भी खिलते है
न रहूँ जब मैं तो क्या वो गुलिस्तान होगा!

जो हूँ अब मैं तो सब रहनुमा है मेरे
न होता मैं तो क्या होता!

अब भी याद आता है साहिल!
तेरे बातों पर उसका यों कह देना
जो हूँ अब मैं, तो जग है मेरा
न होता मैं, तो क्या होता!

- साहिल